नई दिल्ली, जनवरी 29 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। साकेत जिला अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा दायर मानहानि मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना को बरी कर दिया है। यह मामला करीब 25 साल पुराना है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राघव शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस सबूतों के साथ साबित करने में विफल रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना को अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा आप बरी किए जाते हैं। यह मामला दस नवंबर 2000 को एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित हुए विज्ञापन से जुड़ा है। यह विज्ञापन नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज (एनसीसीएल) की ओर से जारी किया गया था, जिसके वीके सक्सेना तत्कालीन अध्यक्ष थे। मेधा पाटकर ने आरोप लगाया था कि इस विज्ञापन में उनके संगठन नर्...