नई दिल्ली, नवम्बर 30 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। एचआई/एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है और महामारी के रुप में देखा जाता है। पिछले दो दशकों में भारत ने इससे निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर पर काम किया है। अब सरकार का लक्ष्य यह है कि 2030 तक इसके खौफ को खत्म कर दिया जाएगा। यानी इसका संक्रमण बेहद सीमित हो जाएगा और यह जन स्वास्थ्य के लिए चुनौती नहीं रहेगा। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2010 से 2024 के बीच में देश में एचआईवी से होने वाली मौतें 81 फीसदी घटी हैं। मौतें 1.73 लाख से घटकर 2024 में 32,300 रह गई। जबकि 2024 में विश्व में 6.30 लाख मौतें एड्स से हुई जिसमें भारत का हिस्सा महज 5 फीसदी है। इसी प्रकार यदि वार्षिक नए संक्रमणों की बात करें तो इस अवधि में इसमें 48.7 फीसदी की कमी आई है।...
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