पलामू, नवम्बर 10 -- मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। इप्टा के संचालित सांस्कृतिक पाठशाला की 86वीं कड़ी में संतों की परंपरा और हमारा समाज विषय पर संवाद का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सत्य बोलने की ताकत रखने वाले ही संत कहलाते हैं। संत की कोई जाति नहीं होती। बिना किसी भेदभाव के समाज को जोड़ने का कार्य जो करता है, वही सच्चा संत होता है। प्रायः हम लोग साधु और संत को एक समान मान लेते हैं, लेकिन दोनों में सूक्ष्म अंतर है। साधु का अर्थ है साधक, ऋषि का अर्थ है ऋचाओं का लेखक, जबकि सत्य मार्ग पर चलते हुए ईश्वर से साक्षात्कार का मार्ग बताने वाले को संत कहा गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव एवं सामाजिक विश्लेषक एवं कार्यकर्ता कमल चंद किस्पोटा ने संयुक्त रूप से की। विषय प्रवेश कराते हुए प्रेम प्रकाश ने कबीर, तुलसी...