नई दिल्ली, दिसम्बर 16 -- सृष्टि की अभिव्यक्ति तीन स्तरों पर होती है- स्थूल, सूक्ष्म और कारण। स्थूल जगत वह है, जिसे हम अपनी इंद्रियों से अनुभव करते हैं, जैसे प्रकृति, शरीर और भौतिक वस्तुएं। यह संसार परम पुरुष की ही अभिव्यक्ति है और उनकी मधुरता से परिपूर्ण है। इसके पीछे जो सूक्ष्म जगत है, वह विचार, भावना, संवेदना और चेतना का क्षेत्र है। जो कुछ हमें भीतर से प्रेरित करता है, जो सोचने-समझने और अनुभव करने की शक्ति देता है, वही सूक्ष्म जगत है। यह परम पुरुष के और गहरे माधुर्य की झलक है। इन दोनों के मूल में कारण जगत स्थित है। यही वह स्तर है, जहां से सृष्टि की सारी संभावनाएं जन्म लेती हैं। कारण जगत में परम पुरुष का रूप अत्यंत कोमल, शांत और आनंदमय है। उनका हंसता हुआ रूप उनकी इच्छा के अनुसार निरंतर परिवर्तनशील रहता है और पूरे ब्रह्मांड में दिव्य प्रक...