लखनऊ, नवम्बर 12 -- लखनऊ, संवाददाता। नदियों का पुनरुत्थान और जल संरक्षण आज के समय की बहुत जरूरी है। पर्यावरण में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। नदियों का पुनर्जीवन तभी संभव है जब शासन की नीतियां, जनमानस की आस्था और विज्ञान की शक्ति एक साथ मिलकर कार्य करें। यह बातें बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने दी पुनरुद्धार और भारतीय ज्ञान प्रणाली: विज्ञान, समाज और सततता विषय पर हो रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि अगर समाज, वैज्ञानिक संस्थान, विद्यार्थी और नीति-निर्माता सामूहिक रूप से इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, तो नदियां फिर अपनी स्वाभाविक धारा में लौट सकती हैं। यह संगोष्ठी पर्यावरण विज्ञान विभाग, स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा उप्र. व शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के संयुक्त सहयोग से हो रहा है। मुख्य अतिथि श...
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