प्रयागराज, फरवरी 21 -- महाकुम्भ की शुरुआत के पहले शासन और प्रशासन पूरे मेले में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान लगाकर बैठे थे। लेकिन गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन त्रिवेणी के प्रति जन समूह में इतनी आस्था है कि अब तक यहां 59 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं। बड़ी बात यह है कि महाशिवरात्रि का आखिरी और प्रमुख स्नान पर्व आने में अभी पांच दिन शेष बचे हैं। ऐसे में यह संख्या 65 करोड़ पार करना लगभग तय है। आमतौर पर माघी पूर्णिमा के बाद मेला क्षेत्र लगभग खाली हो जाता है। महाशिवरात्रि का स्नान पर्व केवल प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से माना जाता है, जबकि अधिकांश लोग काशी में स्नान करने को वरीयता देते हैं। लेकिन इस बार 144 साल बाद के पुण्य का खुमार कुछ ऐसा सिर चढ़कर बोल रहा है कि माघी पूर्णिमा के बाद से ही मेला एकदम बदल...
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