वाराणसी, दिसम्बर 9 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों की भांति ही दक्षिण भारत में भी वलकु (दीप) जलाना शुभता का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया है। दीप प्रज्ज्वलन दक्षिण भारतीय महिलाओं के मुख्य कर्तव्यों में से एक है। दीपक जलाना मंगलसूचक है। यही कारण है कि विवाह के समय ही कन्या को चांदी या पीतल के अलंकृत दीपक आजीवन जलाने के लिए मायके से दिए जाते हैं। दक्षिण भारत में नित्य प्रातःकाल सूर्योदय के समय तथा सूर्यास्तकाल में तेल के दीए हर घर में जलाए जाते हैं। घर, आंगन, पूजागृह को स्वच्छ कर कोलम् (रंगोली) काढ़ने के पश्चात पूजा-स्थल में तेल के दीपक घर की महिलाएं जलाती हैं। काशी के तमिल कलाविद डॉ. राधाकृष्णन गणेशन बताते हैं कि कई घरों में रोरी-चंदन लगाकर, फूल-मालाओं से दीपक की सजावट भी की जाती है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक...
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