नई दिल्ली, दिसम्बर 16 -- आयुर्वेद के अनुसार नाभि (नाभि चक्र) सिर्फ शरीर का एक निशान नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण मर्म बिंदु है। इसे शरीर की 72,000 नाड़ियों से जुड़ा माना जाता है जो संपूर्ण शरीर में ऊर्जा और पोषण के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। प्राचीन समय से नाभि में तेल डालने की परंपरा अपनाई जाती रही है, जिसका उद्देश्य शरीर और त्वचा को अंदर से संतुलित करना है। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह बताती हैं कि अलग-अलग तेलों के गुण अलग होते हैं और नाभि में लगाने पर ये धीरे-धीरे शरीर में अवशोषित होकर अपना असर दिखाते हैं। यह तरीका खासतौर पर स्किन केयर, हार्मोनल बैलेंस, पाचन और जोड़ों के दर्द में सहायक माना जाता है। हालांकि यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन नियमित और सही तरीके से करने पर इसके सकारात्मक परिणाम देखे जा सकते हैं।मुंहासे और स्किन डिटॉक्स के लि...
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