बाराबंकी, नवम्बर 26 -- निन्दूरा। क्षेत्र के कोठार गांव में भगवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को प्रवचक संदीप कुमार महाराज ने पंडाल में मौजूद श्रोताओं को द्रौपदी चीरहरण की कथा सुनाई। कहा कि घटना ऐसी है, जिसका आज भी उल्लेख होता है, तो मानवता शर्मसार हो उठती है। जब सभा में उपस्थित सभी वरिष्ठजनों ने इस घटना पर मौन धारण कर लिया था, तो श्रीकृष्ण ने स्वयं को बचाने के लिए श्रीकृष्ण से प्रार्थना की। द्रौपदी की पुकार सुनकर श्रीकृष्ण ने तुंरत ही अपनी सखी की मदद की लेकिन सवाल उठता है कि आखिर श्रीकृष्ण ने खुद को पुकारे जाने का इंतजार क्यों किया। महाभारत को न्याय और अन्याय के बीच रक्तरंजित युद्ध भी माना जाता है। कौरवों ने पांडव बंधुओं पर अनगिनत अत्याचार किए लेकिन इन अत्याचारों की पराकाष्ठा थी, द्रौपदी का चीरहरण। जब भी द्रौपदी के चीरहरण का उल्लेख किया जाता...