संभल, फरवरी 2 -- श्री कल्कि धाम ऐंचौडा कंबोह मैं रविवार को मासिक सत्संग का आयोजन किया गया।प्रातः काल में सर्वप्रथम यज्ञ हुआ। इसके पश्चात सत्संग का प्रवचन श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने किया। श्री कल्कि धाम ऐंचौडा कंबोह में नियमित मासिक सत्संग का आयोजन में आशीर्वचन करते हुए श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने कहा कि कबीर यदि संत बने तो उसमें सबसे बड़ा योगदान गुरू रामानंद का था। गुरु शिष्य परंपरा के सबसे बड़े वाहकों में संत कबीर का स्थान अत्यंत उच्च है। गुरु शिष्य परंपरा इस सनातनी धरा की विशिष्टता रही है। यहां पर जब ईश्वर ने स्वयं अवतार लिया है तो ईश्वर ने भी इसी परंपरा का अनुसरण किया है। इसका बहुत बड़ा उदाहरण हमें महाभारत में मिलता है। महाभारत युद्ध से पूर्व जब तक अर्जुन योगेश्वर कृष्ण को बंधु, मित्र, सहयोगी, सख...