लखीमपुरखीरी, फरवरी 4 -- कस्बे में आयोजित ऐतिहासिक धनुष यज्ञ मेला के दूसरे दिन रामलीला मंचन में भक्तिरस और उत्साह चरम पर रहा। ओम मिश्रा द्वारा प्रस्तुत राम जन्म प्रसंग और राजा जनक के दरबार में शिव के पिनाक धनुष भंग का दृश्य दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गया। शर्त पूरी करते हुए श्रीराम ने न केवल माता सीता से विवाह रचाया, बल्कि अपने अलौकिक पराक्रम का परिचय देकर समूचे परिसर को जय-जयकार से गुंजायमान कर दिया। इसके बाद ताड़का वध का प्रभावशाली मंचन हुआ। कथा के अनुसार ताड़का मूल रूप से यक्षराज सुकेतु की पुत्री एवं एक सुंदर यक्षिणी थी, जिसे अगस्त्य मुनि के श्राप से राक्षसी रूप प्राप्त हुआ। वह सुबाहु और मारीच के साथ मिलकर ऋषियों के यज्ञों में बाधा डालती थी और ताड़का वन में आतंक फैलाती थी। विश्वामित्र ऋषि के मार्गदर्शन में श्रीराम ने धर्म-संकट से मुक्...