विकासनगर, नवम्बर 2 -- बावन बीघा में चल रही राम कथा के चौथे दिन कथा वाचक राजन महाराज ने श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के जन्म के बाद अयोध्या में चारों ओर शहनाई गूंज रही थी। श्रीराम की बाल लीला संसार की सुखद व आनंदमई लीला है। प्रभु की लीला में ही उनके साम्यवादी चिंतन और उनका क्रियात्मक रूप स्पष्ट होता है। बताया कि श्रीराम बचपन में बहुत सुंदर लीला करते थे। उन्होंने बाल्यकाल में थोड़े ही समय में अपने गुरु से सभी शिक्षा प्राप्त की तथा मानव लीला का पूरी तरह पालन किया। उनके जीवन से हमें शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। श्रीराम ने बाल्यकाल में ही ताड़का, मारीच व सुबाहु जैसे राक्षसों का संहार कर परमगति प्रदान की। कथा वाचक राजन महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपनी भावना से प्रभु की सेवा करनी चाहिए क्योंकि हमारे सभी सुख साधना अ...
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