कन्नौज, मार्च 22 -- छिबरामऊ, संवाददाता। आवास विकास कॉलोनी स्थित सुभाष अकादमी में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन आचार्य प्रशांतानंद चंदन से सीता स्वयंवर का प्रकरण सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए, जबकि झुक जइयो लला एक बार, लली मेरी छोटी है, गीत सुन कर सभी झूम उठे। आचार्य प्रशांतानंद ने धनुष भंग का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि मुनि विश्वामित्र के साथ प्रभु राम जनकपुर में आयोजित धनुष भंग समारोह में पहुंचे तथा गुरु कृपा से उन्होंने सहज ही धनुष भंग कर दिया। आचार्य ने कहा धनुष अहंकार का प्रतीक है और अहंकार तोडऩा भगवान का सरल स्वभाव है, लेकिन अहंकार के नाश के लिए गुरु कृपा का होना अति आवश्यक है। जब तक जीवन में अभिमान रहेगा, तब तक भगवान की प्राप्ति संभव नहीं है। भगवान ने स्वयं अवतार लेकर गुरु महिमा का दर्शन कराया है। बिना गुरुकृपा के ज्ञान की...
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