सहारनपुर, सितम्बर 29 -- गिरत संभारि उठा दसकंधर, भूतल परे मुकुट अति सुंदर,कछु तेहिं लै निज सिरन्हि संवारे, कछु अंगद प्रभु पास पबारे। यानी रावण गिरते-गिरते संभलकर उठा। उसके अत्यंत सुंदर मुकुट पृथ्वी पर गिर पड़े। कुछ तो उसने उठाकर अपने सिरों पर सुधाकर रख लिए और कुछ अंगद ने उठाकर प्रभु श्री रामचंद्रजी के पास फेंक दिए। इसी चौपाई के साथ रामलीलाओं में रावण-अंगद संवाद की लीला का मंचन किया। रावण और अंगद के संवाद सुनकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। कई रामलीलाओं में लंका दहन का भी मंचन किया गया। प्रभी श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। बेहट बस अड्डे के मैदान पर आयोजित प्राचीन रामलीला में भगवान श्रीराम-लक्ष्मण की हाथी सवारी निकाली गई। इसके पश्चात लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। प्रधान विनय जिंदल, मंत्री संजय सिंघल, वैभव बंसल, अमित गर्ग म...
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