रांची, मार्च 20 -- रांची। ज्ञान गंगा स्थल, रवि स्टील चौक में श्री रामकृष्ण सेवा समिति की ओर से आयोजित नौ दिवसीय राम कथा ज्ञान महायज्ञ के दूसरे दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा वाचक संत छोटे बापू ने रामायण की महिमा बताते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में श्रीराम एक आदर्श के रूप में स्थापित हैं। मनुष्य को क्या करना चाहिए यह सब रामचरितमानस में है। इस ग्रंथ के रचयिता महादेव हैं। सृष्टि के आदिकाल में भगवान शिव ने इस कथा को प्रकट किया। वर्षों तक मन में रखा इसलिए इसका नाम रामचरित मानस पड़ा। इसके श्रवण से मन और जीवन को विश्राम की प्राप्ति होती है। संसार में त्रिविध ताप दैहिक, दैविक, भौतिक से पीड़ित मनुष्यों को विश्राम प्रदान करती है। इस कलयुग में कलिमल से निवृत्ति के लिए चार साधन उपनिषदों में बताए गए हैं।
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