सहारनपुर, दिसम्बर 14 -- सहारनपुर। बृजेश नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में प्रसिद्ध भागवताचार्य आत्मानुभवी महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान से ओतप्रोत किया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि जैसे पारस के संग से लोहा सोना बन जाता है और गंदे नाले समुद्र के संग से समुद्र बन जाते हैं, वैसे ही संतों की संगति से नास्तिक और अधम मनुष्य भी श्रेष्ठ मानव बन जाता है। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि मानव का संपूर्ण जीवन स्वयं एक ग्रंथ है, जिसमें समस्त कलाओं और गुणों का विकास होता है। यही मानव जीवन की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। उन्होंने बताया कि आज से 5224 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को योग का उपदेश दिया, जो आज भी संपूर्ण संसार के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहा है। सत्य की चिंगारी जब प्रज्वलित होती है तो वह पाप रूप...