चतरा, जनवरी 29 -- चतरा संवाददाता। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को यज्ञायाचार्य श्री बैकुंठनाथ स्वामी ने श्रद्धालुओं को श्री राम और रावण के चरित्र के माध्यम से जीवन मूल्यों का संदेश दिया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि रावण के पास अपार ऐश्वर्य था, सोने की लंका थी, शक्ति और विद्या भी थी, लेकिन वह अपने से बड़ों का आदर नहीं करता था। इसी कारण वह अपने वैभव, परिवार और लंका की रक्षा नहीं कर सका और अंतत: उसका पतन हो गया। वहीं श्री राम के चरित्र का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने कहा कि भगवान राम अपने से बड़े, छोटे और समान सभी का सम्मान करते थे। गुरुजनों, माता-पिता और समाज के प्रति आदरभाव के कारण वे हर क्षेत्र में आगे बढ़े और मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।प्रवचन का मुख्य संदेश यह रहा कि जीवन में सच्ची सफलता के लिए बड़ों का सम्मान करना, प्र...