गाजीपुर, फरवरी 9 -- भांवरकोल। क्षेत्र के कनुवान गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन भक्तिमय वातावरण में कथा का समापन हुआ। वृंदावन से पधारे कथा व्यास प्रेमनिधि दास महाराज ने सुदामा चरित्र एवं राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने बताया कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। घोर गरीबी में जीवन व्यतीत करने के बावजूद वे सदैव भगवान के स्मरण में लीन रहते थे। पत्नी सुशीला के आग्रह पर जब सुदामा द्वारका पहुंचे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें देखते ही नंगे पांव दौड़कर गले लगा लिया। प्रभु ने स्वयं उनके चरण धोए और उन्हें सिंहासन पर बैठाकर सम्मान दिया। भगवान की कृपा से सुदामा के गांव में महल बन गया, लेकिन उन्होंने वैभव त्याग कर प्रभु भक्ति को ह...