मुजफ्फरपुर, जनवरी 27 -- बंदरा, एक संवाददाता। घोसरामा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा वाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने मनुष्यों का कर्तव्य का बोध कथा के माध्यम से कराया। उन्होंने कहा कि विडंबना है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। नवयुवक नाट्यकला परिषद् सह सांस्कृतिक मंच की ओर से कथा के दौरान उन्होंने निस्काम भाव से भक्ति का लाभ बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान है। जबकि शरीर नश्वर है। चंचला दीदी ने कहा कि यह संसार भगवान का सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में फूल खिले हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मों द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है, त...