सुल्तानपुर, फरवरी 4 -- चांदा, संवाददाता। संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में अपने समय, साधन और सामर्थ्य का अपव्यय करने की जगह हमें अपने अंदर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उक्त उद्गार कथा व्यास शिवि दीक्षित ने कोइरीपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के पांचवें दिन उपस्थित भक्तों के समक्ष व्यक्त किए। कथा व्यास ने भगवान की बाल लीलाओं का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। भागवताचार्य ने कहा कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। जीव का कल्याण इसी में संभव है। श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा भर नहीं थे, बल्कि उन्हें दीक्षित करने वाले जगद्गुरु भी थे। श्रीकृष्ण ने उनकी आत्मा का जागरण किया और फिर आत्मिक स्तर पर स्थित रहकर सुंदर जीवन जीने का अनूठा पाठ पढ़ाया। कथा के बीच बीच सुमधुर संगीत स्वर लहरियों से वातावरण भक्ति...
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