जामताड़ा, अप्रैल 5 -- बिन्दापाथर। क्षेत्र के पुनसिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वृन्दावन धाम के कथावाचिका पूज्या सुमन किशोरी ने भक्त प्रह्लाद चरित्र, हिरण्यकश्यप वध, भगवान राम एवं श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव प्रसंग का मधुर वर्णन किया। कथावाचिका ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन ही संघर्ष से शुरू हुआ। लेकिन इसकी शिकन कभी उनके चेहरे पर नहीं दिखी। वह हमेशा मुस्कराते हुए बंशी बजाते रहते थे। समस्याओं को ऐसे ही मुस्कराते हुए सुलझाने की सीख औरों को भी देते थे। द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करता था। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह बसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ। एक दिन कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई कि इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा। यह सुनकर कंस बसुदे...
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