मुजफ्फरपुर, जनवरी 28 -- बंदरा। घोसरामा में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को कथावाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं लीलाओं का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब प्रभु अवतरित होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के घरों से माखन चोरी की। इस घटना के पीछे भी आध्यात्मिक रहस्य है। दूध का सार तत्व माखन है। उन्होंने गोपियों के घर से केवल माखन चुराया अर्थात सार तत्व को ग्रहण किया और असार को छोड़ दिया। इस माध्यम से प्रभु हमें समझाना चाहते हैं कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। इसलिए असार यानी संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में अपने समय, साधन और सामर्थ्य को अपव्यय करने की जगह हमें अपने अंदर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसी से जीवन का कल्याण संभव है।...