वाराणसी, जनवरी 3 -- वाराणसी। रास पंचाध्यायी भगवान श्रीकृष्ण का प्राण है। राधारानी भगवान की आत्मा है। श्रुतिरूपा, ऋषिरूपा एवं अग्निकुमारिकाएं ही गोपिया हैं। जिनके साथ पूर्ण परब्रह्म परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण ने रासलीला की थी। उसमें काशी विश्वनाथ गोपी का रूप धारण कर पधारे थे। ये बातें आचार्य दिलीप शास्त्री ने कहीं। वह भारत भारती परिषद की ओर से आसभैरव स्थित अग्रवाल भवन में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमदभागवत भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी का साक्षात स्वरूप है। इसके बाद वृंदावन से आए पं.अम्बुज कृष्ण शास्त्री ने भी प्रवचन किया। इस मौके पर पं.सिद्धनाथ पांडेय, पं.कमलेश त्रिपाठी, पं.सत्येन्द्र तिवारी, अशोक वल्ल्भदास, संतोष अग्रवाल, तेजबहादुर, राजीवन द्रविड़, सचिन, पूजा, राजीव, राकेश, मंजू, ओमप्रभा आद...
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