श्रावस्ती, मई 5 -- श्रावस्ती, संवाददाता। महंगाई के चलते जहां आज किसान खेती किसानों से मुंह मोड़ रहे हैं। वहीं नदी के तटवर्ती इलाकों के किसान रेत को खेत बनाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। इससे न केवल उनका जीवन स्तर सुधर रहा है बल्कि वह आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे हैं। राप्ती नदी को वैसे तो श्रावस्ती का शोक कहा जाता है। यहां बाढ़ के समय हजारों ग्रामीण बेघर हो जाते हैं। खेतों में लगी फसल तबाह हो जाती है। रेत पट जाने से कृषि भूमि बंजर हो जाती है। ऐसे में तटवर्ती गांवों के किसानों ने रेत को ही खेत बनाकर अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। रेत में किसान बेहद कम लागत पर तीन महीने के अंदर लाखों कमा लेते हैं। किसान राप्ती की रेत में तरबूज, खरबूजा, ककड़ी के साथ ही हरी सब्जी जैसे खीरा, लौकी, कद्दू, करैले का भी उत्पादन करते हैं। इस फसल में किसी खाद की जरूरत ...
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