दरभंगा, जनवरी 2 -- दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि में षण्मासिक शोध पाठ्यक्रम के समापन पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि शोध कार्यों में हमेशा नूतन पद्धति का उपयोग श्रेष्ठकर होता है। प्रवृत्ति से ही जिज्ञासाएं उत्पन्न होती हैं। शोध की विशिष्टता, उसकी नवीनता, वैज्ञानिकता समाज व शैक्षणिक दुनिया के सापेक्ष में होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि शोधार्थी एवं मार्गदर्शक के परस्पर समन्वय से ही शोध कार्यों में गहराई आती है। विशिष्ट अतिथि कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि शोध में पर्यवेक्षक एवं शोध शीर्षक के चयन में शोधार्थी को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। शोधार्थी को गुणवत्तापूर्ण नूतन तथ्यों का अन्वेषण कर समय पर शोध कार्य पूर्ण कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच में शोध कार्य बड़ी...
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