लखनऊ, जनवरी 1 -- शोध पत्र लखनऊ, संवाददाता। भारत में एआई कॉपीराइटेड सामग्रियों का इस्तेमाल किस हद तक कर सकती है, इस पर भारतीय न्यायपालिका को दायरा तय करना होगा। यह सुझाव उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान और लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय से जुड़े विधि विशेषज्ञों ने यूरोपीय संघ, अमेरिका और ब्रिटेन के कानूनी ढांचों की तुलना कर अपने शोध पत्र में दिए हैं। दोनों संस्थानों के विधि विशेषज्ञों ने अंडरस्टैंडिंग इन्टेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन इश्यूज सराउंडिंग रैपिड टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट्स लाइक जेनेरिटव एआई नामक शोध पत्र प्रस्तुत किया है। जिसे एटलांटिस प्रेस स्प्रिंगर नेचर की ओर से प्रकाशित प्रोसीडिंग्स ऑफ द इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लॉ एंड टेक्नोलॉजी (आईसीएलटी 2025) ने प्रकाशित किया है। प्रोफेसर अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इस अध्यय...