बस्ती, मई 31 -- कुदरहा। छरदही गांव में चल रही नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ से प्रवचन सत्र में व्यक्त करते हुए कथावाचक पं. घनश्याम किशोर मिश्र ने शुकदेव व महाराज परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वन में चले गए। उनको प्यास लगी तो शमीक ऋषि से पानी मांगा। ऋषि समाधि में थे। राजा परीक्षित ने मरा हुआ सांप शमीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने शमीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि पुत्र ने श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक सर्प राजा को डसेगा। शमीक ऋषि ने परीक्षित को इसके बारे में बताया। तो वह अपना राज्य पुत्र जन्मेजय को देकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां व्यास नंदन ने भगवत कथा सुनाई। इस दज्ञैरान राजेंद्र प्रसाद दुबे, आनंद मिश्रा, राजू दुबे, नरेंद्र प्रसाद, धर्मेद्र दुबे, रविद्...
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