नई दिल्ली, मई 27 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को विनायक दामोदर सावरकर का नाम 1950 के कानून में शामिल करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी। यह कानून व्यावसायिक और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए कुछ प्रतीकों और नामों के अनुचित इस्तेमाल रोकने का अधिनियम है। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का कोई हनन नहीं हुआ है। व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता ने पीठ से कहा कि वह पिछले 30 साल से सावरकर पर शोध कर रहे हैं और उन्हें कानूनी रूप से सत्यापन योग्य तरीके से सावरकर के बारे में कुछ तथ्य स्थापित करने का अवसर चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से केंद्र और गृह मंत्रालय को उनका नाम प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 की अनुसूची में शामिल करने के निर्देश जारी करने का अ...
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