नई दिल्ली, जुलाई 15 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फोरेंसिक साक्ष्यों में कमियों और डीएनए नमूनों के प्रबंधन पर देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए। इसके साथ ही हत्या के एक मामले में मौत की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि अब से फोरेंसिक साक्ष्य वाले ऐसे सभी मामलों में, उचित सावधानी के साथ डीएनए नमूने एकत्र किए जाएं और त्वरित एवं उचित पैकेजिंग सहित सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनका दस्तावेजीकरण किया जाए। डीएनए नमूनों पर इनके हस्ताक्षर होने चाहिए डीएनए नमूने एकत्र करने से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए, अदालत ने कहा कि संग्रह को दर्ज करने वाले दस्तावेज में मौजूद चिकित्सा पेशेवर, जांच अधिकारी और स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर और पदनाम हो...
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