गाजीपुर, मार्च 7 -- भांवरकोल। क्षेत्र के पलियां बुजुर्ग गांव में आयोजित रामकथा में पंडित यशवंत ने कहा कि भगवान राम-लक्षमण अपने गुरू विश्वामित्र के साथ सीता स्वयंवर में भाग लेने के लिये जनकपुरी पहुंचे। यहां भगवान राम की माता सीता से पुष्प वाटिका में भेंट होती है। दोनों एक-दूसरे को निहारते और मंद-मंद मुस्कुराते हैं। प्रसंग में भगवान शंकर का धनुष टूटते ही लोग जय श्रीराम के जयकारे लगाने लगते हैं। पंडित यशवंत महाराज बताते हैं कि मां सीता मंदिर में जाकर सखियों के साथ गौरी पूजन कर भगवान राम को अपने मन मंदिर में विराजित कर लेती हैं। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने पांच प्रकार की भक्ति का वर्णन किया है। चातक श्रेणी की भक्ति उत्तम मानी गई है। ये चातक श्रेणी की भक्ति है। दूसरी कोकिल जो प्रभु का गुणगान करने वाली भक्ति है। कीर माला रटने वाली चकोर...
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