फतेहपुर, नवम्बर 30 -- खागा। शिक्षा तो मिल गई, लेकिन संस्कार कैसे मिले, शिक्षा के साथ संस्कारों का अभाव आज समाज की सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है। यदि शिक्षा में नैतिकता नहीं जोड़ी गई, तो देश का निर्माण अधूरा रह जाएगा। रविवार को संवत क्षेत्र के करियामऊ में आयोजित एक भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल ने उक्त विचार प्रकट करते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुए अनिल ने कहा कि कुष्ठ रोगियों के बीच सेवा कार्य करना वास्तव में ईश्वर सेवा है, क्योंकि नर सेवा ही नारायण सेवा है। समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों के पास पहुंचकर उनकी पीड़ा मिटाना ही सच्चा मानव धर्म है। देश में तेजी से बढ़ रहे वृद्धाश्रम और अनाथालय हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि हम कहां चूक रहे है...
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