मुजफ्फरपुर, जनवरी 5 -- मुजफ्फरपुर। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा में तिलकुट का तड़का लगते ही स्वाद और परंपरा का संगम साकार हो उठता है। लेकिन, हमारी थाली का स्वाद बढ़ाने वालों की जिंदगी में जायका कम होता जा रहा है। गुड़, लाई और तिलकुट बेचने वाले दुकानदारों का दर्द है कि कच्चा माल महंगा होता जा रहा है और मुनाफा घटता जा रहा है। मांग बरकरार होने के बावजूद जेबें खाली हैं। मकर संक्रांति से पहले कारोबार सुस्त होने से बेहतर आमदनी की उम्मीद धुंधली होती जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि पारंपरिक तिलकुट-लाई उद्योग को हेरिटेज से जोड़ा जाना चाहिए। कारीगरों को आर्थिक सहायता व सुरक्षा मिले। कुशल कारीगरी के लिए सरकारी प्रशक्षिण भी जरूरी है। मांग की कि शहर में विशेष हाट या स्थायी बाजार हो तो न केवल उत्पाद की ब्रांडिंग होगी, बल्कि सही दाम भी मिल पाएगा। तिलक...
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