हरिद्वार, फरवरी 8 -- प्राकृतिक और मानव जनित आपदा के बाद प्रभावित लोगों के लिए मनोसामाजिक मदद जरूरी है। क्योंकि, आपदा के बाद शरीर ही नहीं, मन भी टूटता है। यह बात ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय के प्रो. नरेश चौधरी ने कही। वे उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी नैनीताल में आयोजित 'साइको सोशल सपोर्ट इन इमरजेंसीज' विषय पर तीन दिनी कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि 2013 की केदारनाथ आपदा, कुंभ मेले, सोमवती अमावस्या जैसे स्नान पर्वों में हुई भगदड़ और कोविड-19 जैसी जैविक आपदा के बाद प्रभावित परिवारों पर गहरा मानसिक आघात पड़ा, जिसका असर लंबे समय तक रहता है। ऐसे में त्वरित मनोसामाजिक सहयोग ही पीड़ितों को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सबसे पहले पहुंचने वाले प्रशिक्षित स्वयंसेवक पीड़ितों को मानसिक संबल देने ...
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