गोरखपुर, मार्च 8 -- गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। कोई भी संक्रामक रोग मात्र किसी जीवाणु या विषाणु के शरीर में प्रवेश मात्र से संभव नहीं है। व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी से ही संक्रामक रोग का प्रकोप होता है। अत: आयुर्वेद पाश्चात्य विधा की तरह एंटीबायोटिक औषधियों के स्थान पर व्याधिक्षमत्व (रोग प्रतिरोध क्षमता) बढ़ाने वाली वनौषधियों का प्रयोग करने पर बल देता है। इससे न केवल संक्रामक अपितु जीवनशैली जन्य रोगों को भी रोका जा सकता है। यह कहना है विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. जीएस तोमर का। वह शुक्रवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के अंतर्गत गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सा विज्ञान संस्थान में सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विश्व का प्राचीनतम चिकित्सा विज्...
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