इटावा औरैया, फरवरी 4 -- इटावा, संवाददाता। प्रस्तावित उर्स की अनुमति न मिलने और शब-ए-बारात के मौके पर मजार तक पहुंच पर पूरी तरह रोक लगाए जाने के बाद स्थिति संवेदनशील हो गई है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए पूरे इलाके में कड़ी निगरानी बढ़ा दी है, वहीं मजार प्रबंधन और अल्पसंख्यक समाज में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। धार्मिक आस्था, वन कानून और प्रशासनिक सख्ती के बीच यह मामला अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। तीन फरवरी की रात शब-ए-बारात के मौके पर फिशरवन के बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद बाबा की मजार पूरी तरह अंधेरे में डूबी रही। हर साल रोशनी, इबादत और हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी से गुलजार रहने वाली यह मजार इस बार वीरान नजर आई। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत श्रद्धालु अपने पुरखों के लिए फातिया पढ़ने यहां पहुंचते थे, लेकिन इस ...