सीवान, फरवरी 4 -- नौतन,एक संवाददाता। शब-ए-बारात, जिसे माफी की रात या लैलतुल-बरात भी कहा जाता है। इस्लाम में बहुत ही मुकद्दस और रहमत भरी रात मानी जाती है। यह इस्लामी हिजरी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इस रात को अल्लाह तआला अपने बंदों के नाम-ए-आमाल में बदलाव करते है। और उनकी मगफिरत फरमाते है। उक्त बातें हाफ़िज़ अख्तर अंसारी ने कही। बता दें कि इस बार 3 फरवरी 2026 की शाम से शुरू होकर 4 फरवरी 2026 की सुबह तक शब-ए-बरात मनाई गई। यह तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस रात के बाद लगभग 15 दिन में रमजानुल मुबारक का पाक महीना शुरू हो जाता है। इसलिए इसे रमजान की तैयारी का आखिरी मौका भी माना जाता है। इस मुबारक रात में मुसलमान नमाज-ए-तहज्जुद, कुरान-ए-पाक की तिलावत, इस्तिगफार, दरूद शरीफ और दुआएं पढ़ते है। इसके अलावा लो...
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