नई दिल्ली, फरवरी 3 -- शब-ए-बारात मुसलमानों का महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे चंद्र दर्शन के अनुसार मनाया जाता है। यह इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 15वीं (शब) रात को मनाया जाता है। पैगंबर-ए-इस्लाम ने फरमाया कि 'रजब अल्लाह का महीना है और शाबान मेरा। रमजान मेरी उम्मत का महीना है।' इस रात में इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। लोगों के अमाल (कर्म) रब की बारगाह में पेश किए जाते हैं। शब-ए-बारात एक फारसी शब्द है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है- शब यानी रात और बारात यानी मुक्ति (छुटकारा) मतलब गुनाहों से छुटकारे की रात। ये रात उन खास रातों में एक होती है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों की दुआएं कुबूल करता है। इस्लामिक धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात को क्षमा (माफी) के रूप में देखा जाता है, जब मुसलमान अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और आने ...