उरई, फरवरी 1 -- उरई। मुस्लिम समाज में शब-ए-बरात को गुनाहों से मग़फिरत (माफी) और रहमत की रात माना जाता है। इस मुबारक रात में अल्लाह अपने बंदों की तौबा कुबूल फरमाता है। शब-ए-बरात का पर्व 3 फरवरी की शाम से शुरू होकर 4 फरवरी की सुबह तक मनाया जाएगा। इस दौरान कुरआन की तिलावत, नफिल नमाज़ और दुआओं का खास महत्व है। शब-ए-बरात का अर्थ गुनाहों से निजात की रात है। उलेमाओं के अनुसार मजहब-ए-इस्लाम में इस रात की बड़ी अहमियत बयान की गई है। कहा जाता है कि इस रात आने वाले साल से जुड़े कई फैसले तय होते हैं। किसकी पैदाइश होगी, किसकी मौत होगी और किसे कितनी रोज़ी नसीब होगी। शब-ए-बरात को रमजान की तैयारी की रात भी माना जाता है। हिजरी कैलेंडर के मुताबिक यह रात शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। पर्व को लेकर मुस्लिम समुदाय में उत्साह है। घरों...