नई दिल्ली, सितम्बर 11 -- चंद्रमा और शनि के एक साथ होने के कारण यह दोष बनता है। अगर ये दोनों ग्रह कर्क और मकर राशि में, या एक दूसरे के नक्षत्र में हों, तो इस योग का निर्माण होता है। शनि और चंद्रमा के आधार पर किसी कुंडली में पुनर्फू दोष होता है। यदि कुंडली में शनि और चंद्रमा एक साथ हों, या चंद्रमा या शनि शनि के घर में हों, या दृष्टि रखते हों, तो पुनर्फू दोष होता है। आपको बता दें कि शनि अनुशासन, मेहनत और देरी के कारक है, वहीं चंद्रमा, इमोशंस, फैसले और माइंड का कारक हैं, ऐसे में इन दोनों के साथ आने से व्यक्ति की लाइफ में जीवन में भावनात्मक संतुष्टि का अभाव रहता है। भावनात्मक असुरक्षा रहती है। इंसान रिश्तों को लेकर चयनात्मक हो जाता है। उसे प्रेम की कमी महसूस हो सकती है।कुंडली में बनें यह पुनर्फू दोष तो क्या होता है अगर आपकी कुंडली में यह दोष ब...
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