नई दिल्ली, नवम्बर 12 -- दिल्ली धमाके की गूंज अब तक शांत नहीं हुई है। इस मामले में जितने भी संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, उनमें से अधिकतर पढ़े-लिखे लोग हैं। यही कारण है कि इसे 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉडल' कहा जा रहा है। आखिर क्या है व्हाइट कॉलर आतंकवाद? दरअसल, इसका तात्पर्य उन आतंकियों से है, जो पढ़े-लिखे और पेशेवर हैं। इनमें कोई डॉक्टर होता है, तो कोई इंजीनियर, तो कोई प्रबंधन क्षेत्र का पेशेवर। कहने को तो ये पढ़े-लिखे और डिग्रीधारक होते हैं, लेकिन इनका असली काम आतंकवाद फैलाना और आतंकी गतिविधियों में शामिल होना है। दिल्ली धमाके में जो गिरफ्तारियां हुई हैं, उनमें डॉक्टर अधिक हैं। इनके तार दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक हैं, जिसका मतलब है कि पूरे देश में व्हाइट कॉलर आतंकियों का नेटवर्क बढ़ रहा है। आमतौर पर यह धारणा रही है कि गरीबी व अशिक्षा से ह...