सहरसा, फरवरी 22 -- महिषी, एक संवाददाता। भारती मंडन व्याख्यानमाला के तहत उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत कालेज के सभागार में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यानकर्ता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में काशी की न्याय परंपरा विषय पर अनुसंधान कर रहे डॉ. मुनीश कुमार मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में न्याय दर्शन का विशेष स्थान है। महर्षि गौतम प्रणीत न्याय दर्शन की उत्पत्ति का स्थान यद्यपि मिथिला रहा किंतु वैश्विक स्तर पर इसका प्रसार गौतम के काशी जाने के उपरांत ही हुआ। काशी में न्याय दर्शन परंपरा को समृद्ध करने में मिथिला के न्याय दर्शन के आचार्यों का अमूल्य योगदान है, जिनकी एक वृहद श्रृंखला काशी में विद्यमान रही है। इनमें से महर्षि गौतम, आचार्य उदयन, शंकर मिश्र, शुभंकर मिश्र, बच्चाजी, बालकृष्ण मिश्र, गंगानाथ झा, रुद्...
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