पूर्णिया, नवम्बर 5 -- कसबा। आज से पांच दशक पहले चुनाव में इतना शोर शराबा नहीं रहता था। प्रत्याशी आते थे। घर के सभी सदस्यों से मिलते थे। उस समय का चुनाव प्रचार काफी शांतिपूर्ण होता था। प्रत्याशी का प्रचार नौजवान खुले दिल से करते थे। उस समय प्रत्याशी प्रचार के दौरान रात हो जाने पर किसी गांव में रूकते थे। प्रत्याशियों के बीच ईर्ष्या और द्वेष की भावना नहीं रहती थी। उक्त बातें कसबा प्रखंड के मोहनी पंचायत अंतर्गत मोहनी गांव के 69 वर्षीय बिमला देवी ने कही। उनका कहना है कि वर्ष 1977 में चुनाव में अपना मताधिकार का प्रयोग किया। इस बार भी विधानसभा चुनाव 11 नवम्बर को होने वाला है। उसमें भी अपना एक कीमती मत अपने चहेते प्रत्याशी को देंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 के दशक में चुनाव प्रचार का माध्यम पैदल, साईकिल और बैलगाड़ी होता था। उस समय प्रत्याशी सा...