नई दिल्ली, फरवरी 13 -- अजमेर। भारतीय शिक्षा परंपरा केवल सूचना प्राप्ति का माध्यम नहीं अपितु मनुष्य के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित विकास का साधन रही है। इसी दिव्य परंपरा को पुनर्जीवित करने का महान संकल्प महर्षि दयानंद सरस्वती ने लिया था। उन्होंने ऐसी शिक्षा की कल्पना की थी, जो वेदसम्मत, तर्कसंगत, वैज्ञानिक, नैतिक और राष्ट्र की प्रेरक हो। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय उसी ऋषि-दृष्टि का आधुनिक मूर्त रूप है, जहां शिक्षा केवल उपाधि अर्जन का साधन नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि का निर्माण है। जहां ज्ञान का उद्देश्य केवल आजीविका नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कृति और चेतना का संवर्धन है। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह विश्वविद्यालय अपने संचालन और शैक्षणिक दर्शन में महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों से अनुप्रा...