नई दिल्ली, जनवरी 31 -- केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सामग्री वाला वीडियो साझा करने के मामले में यूट्यूब चैनल के प्रधान संपादक को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि दृश्यों में कोई अश्लील सामग्री नजर नहीं आती। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने टी. पी. नंदकुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्हें राहत दी। याचिका में दावा किया गया कि वीडियो में ऐसी कोई अश्लील सामग्री नहीं है, जो आईटी अधिनियम के तहत अपराध के दायरे में आती हो। नंदकुमार ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उनकी वीडियो रिपोर्ट दोहरे मापदंड की पृष्ठभूमि में पूरी तरह से एक राजनीतिक और तुलनात्मक विश्लेषण थी। अभियोजन पक्ष ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया था कि वीडियो जनता को विद्रोह के लिए उकसाने और मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने के इरादे से साझा किया गया था। ...