एटा, फरवरी 9 -- मिट्टी में आ रही कमी के कारण जनपद में दहलन का उत्पादन खत्म होने के कगार पर है। जबकि अरहर की फसल पूरी तरह से खत्म हो गई। किसानों ने इसकी भरपाई के लिए मक्का का साहरा लिया है। मक्का किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। सिर्फ 90 दिन में यह फसल तैयार हो रही है। इससे किसान अगली फसल कर रहा है। आज से करीब दस वर्ष पहले की बात करें तो एटा में बडे पैमाने पर दलहन की खेती होती थी। इसमें अरहर की फसल खूब होती थी, लेकिन अब अरहर की खेती पूरी तरह से बंद हो गई। सरकार से मिलने वाला लक्ष्य भी नहीं आ रहा है। जबकि मूंग का भी रकबा कम हो गई। अब सिर्फ 1957 हेक्टेयर में ही यह खेती हो रही है, जबकि उर्द की खेती सिर्फ 308 हेक्टेयर जमीन में हो रही है। जायद की फसलों में प्रमुख दलहन की खेती मानी जाती थी। इसमें अब प्रमुख खेती में मक्का और बाजरा शामिल हो ग...
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