वाराणसी, फरवरी 20 -- वाराणसी। करीब डेढ़ साल के विनायक के इलाज के लिए उसके माता-पिता आमजन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। दिल्ली एम्स के चिकित्सकों के मुताबिक विनायक को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) है। यदि उसे नौ करोड़ रुपये में आने वाला इंजेक्शन नहीं लगाया गया तो वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकेगा। चिकित्सकों का कहना है कि यह बीमारी दस लाख बच्चों में से किसी एक को होती है। मिर्जापुर जिले के करजी गांव के आलोक और प्रतिभा अपने इकलौते बेटे के लिए आमजन से मदद की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक छोटी मदद भी उनके बच्चे के लिए जीवनदान साबित हो सकती है। इस बीमारी से लड़ने के लिए ज्यादातर मामलों में क्राउड फंडिंग के जरिए पैसे जुटाए जाते हैं, साथ ही सरकार से भी मदद मांगी जाती है। दुर्लभ न्यूरो-मस्क्यूलर जेनेटिक बीमारी बीएचयू के डिप्टी एमएस और बा...