मुजफ्फरपुर, मार्च 11 -- मुजफ्फरपुर। जिले के सरकारी स्कूलों में पांच लाख बच्चों के लिए भोजन बनाने वाले 10 हजार रसोइये अपनी पीड़ा अपने तक ही रखकर रोज चूल्हा सुलगाते हैं। इनमें आठ हजार से अधिक महिलाएं हैं। इनका कहना है कि हम काम भले ही स्कूल का करती हैं, मगर अधिकार मजदूरों वाले भी नहीं मिले हैं। महज 1650 रुपये मानदेय निर्धारित है। वह भी हर महीने नहीं मिलता है। छुट्टी सहित अन्य सुविधाएं तो दूर, बात-बात पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। इससे हम खुद को प्रताड़ित महसूस कर रही हैं। मानदेय बढ़ाने की बात तो हो रही है, मगर इसे नियमित करते हुए छुट्टी समेत अन्य सुविधाएं भी मिलें तो बच्चों को पेट भर खाना खिलाने वालों को आधे पेट गुजर-बसर नहीं करना पड़ेगा। जिले के दो हजार सरकारी स्कूलों में 10 हजार से अधिक रसोईया कार्यरत हैं। इनमें आठ हजार से अधिक सं...
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