प्रयागराज, जनवरी 31 -- प्रयागराज। 10 वर्षीय पारो की पढ़ाई अक्सर रुक-रुक कर होती थी। रोजगार की तलाश में परिवार के साथ होने से उसकी शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा था। लेकिन, दुनिया के सबसे बड़े जनसमूह के बीच संचालित एक खुले विद्यालय ने न सिर्फ उसकी पढ़ाई को सहारा दिया, बल्कि दो बार उसकी सीखने की यात्रा को आगे बढ़ाया। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के गाजीपुर क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार की छात्रा पारो पहली बार अपने माता-पिता के साथ महा कुंभ के दौरान प्रयागराज आई थी। हर साल काम की तलाश में होने वाले इस पलायन के कारण वह लंबे समय तक अपने गांव के स्कूल से दूर रहती थी, जिससे उसकी पढ़ाई की रफ्तार धीमी पड़ जाती थी। महाकुंभ के दौरान पारो का परिचय विद्या कुंभ से हुआ, मेले के क्षेत्र में संचालित वह खुला विद्यालय, जिसका उद्देश्य प्रवासी परिव...
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