प्रयागराज, अक्टूबर 6 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि विक्रय करार (एग्रीमेंट टू सेल) के आधार पर कोई भी व्यक्ति भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का हकदार नहीं बन जाता। वह मुआवजे में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकता। बिक्री अनुबंध संपत्ति में कोई अधिकार या हित सृजित नहीं करता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने मेरठ ने हामिद व नौ अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में याचियों के संबंध में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण मेरठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। मेरठ के बिजौली गांव में खसरा संख्या 346 और 426 को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए अधिग्रहीत किया गया था। भूस्वामियों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया, जिस पर याचियों ने आपत्ति की। उनका कहना था कि उनके पास...
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