नई दिल्ली, दिसम्बर 5 -- दुनिया के पास 1.5 सेल्सियस तापमान सीमा पार करने से पहले अब केवल तीन वर्ष बचे हैं और वैश्विक कार्बन बजट में सिर्फ 130 गीगाटन कार्बन डाईऑक्साइड की क्षमता शेष है। इसके बावजूद, पिछले महीने ब्राजील में आयोजित कॉप-30 में अमीर देशों (जो ऐतिहासिक उत्सर्जन के 80% के लिए जिम्मेदार हैं) ने अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों पर चर्चा तक नहीं की। वहीं, इसमें 1,600 जीवश्म ईंधन से जुड़े बैचौलियों की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि अंतिम दस्तावेज में जीवाश्म ईंधन शब्द शामिल न हो। एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और 2007 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आईपीसीसी रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका जोयिता गुप्ता ने इसे जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय की विफलता बताया। 23वें हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के एक ऑनलाइन सत्र में उन्होंने कहा कि दुनिया त...